औरंगाबाद सदर अस्पताल: स्वास्थ्य सेवा या लापरवाही का अड्डा?

0
Screenshot_2025-08-05-10-53-59-31_5600c4be318a3a39d7eb640dd568d217

​औरंगाबाद सदर अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार किसी अच्छी खबर के लिए नहीं, बल्कि अपनी बदहाली और कथित लापरवाही के कारण. हाल ही में हुई कुछ घटनाओं ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. ऐसा लगता है कि यहां के प्रबंधन और डॉक्टरों को आम जनता की सेहत से ज्यादा अपनी कमाई की चिंता है.

एंटी-वेनम की कमी से सिपाही की मौत: उपलब्ध क्या है?

​पिछले दिनों एक सिपाही की सांप काटने के बाद मौत हो गई. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों के मुताबिक, सदर अस्पताल में एंटी-वेनम उपलब्ध नहीं था, जिसके कारण सिपाही की जान नहीं बचाई जा सकी. यह घटना अस्पताल की व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा है. जब एक इमरजेंसी विभाग में जीवन रक्षक दवाएं ही उपलब्ध न हों, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि यहां आखिरकार उपलब्ध क्या है? क्या अस्पताल सिर्फ नाम के लिए चल रहा है? इस मामले में जिला पदाधिकारी के द्वारा संज्ञान भी लिया गया है लेकिन देखते है कार्रवाई होगी या खानापूर्ति होकर रह जाएगा।

गलत इलाज और लापरवाही की कहानी

​यह अकेली घटना नहीं है. हाल ही में एक और मामला सामने आया, जो सदर अस्पताल की लापरवाही की पोल खोलता है. औरंगाबाद के कुशी से एक परिवार अपने बीमार बुजुर्ग को लेकर सदर अस्पताल पहुंचा. उनकी हालत गंभीर थी, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने उन्हें ब्रेन हेमरेज बता दिया. घबराए परिवार ने उन्हें आनन-फानन में किसी निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि बुजुर्ग को सांस लेने में तकलीफ हो रही है. सही इलाज मिलने के बाद वह एक सप्ताह में पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट आए.

​यह घटना दर्शाती है कि सदर अस्पताल के डॉक्टर या तो मरीजों को ठीक से देखना नहीं चाहते, या फिर उनके पास आवश्यक ज्ञान और कौशल की कमी है. क्या ऐसे अयोग्य लोग ही यहां काम कर रहे हैं?

क्या अस्पताल कमाई का जरिया बन गया है?

​इन घटनाओं को देखते हुए यह आरोप लगाया जा रहा है कि सदर अस्पताल में कुछ डॉक्टर सिर्फ ड्यूटी के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं. ऐसा लगता है कि उनका मुख्य मकसद पोस्टमार्टम रिपोर्ट और इंजुरी रिपोर्ट जैसे कामों के जरिए पैसा कमाना है, न कि मरीजों का इलाज करना.

​आम जनता का विश्वास सदर अस्पताल से उठता जा रहा है. अगर प्रशासन और प्रबंधन ने जल्द ही इस पर ध्यान नहीं दिया तो यह अस्पताल सिर्फ एक सरकारी इमारत बनकर रह जाएगा, जहां लोग इलाज की उम्मीद में आएंगे, लेकिन सिर्फ निराशा ही हाथ लगेगी. इस मामले में आपकी क्या राय है? क्या आपको भी लगता है कि सदर अस्पताल की कार्यप्रणाली में सुधार की सख्त जरूरत है?

Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed