बिहार: ‘सुशासन बाबू’ के राज में, अस्पताल में घुसकर हत्या और पुलिस की ‘लम्बे हाथ’ की सिकुड़ती कहानी!
पटना, बिहार: यह बिहार है, जनाब! यहां “गजबे भोकाल” है और इस भोकाल का ताजातरीन नमूना राजधानी के एक तथाकथित वीवीआईपी अस्पताल में देखने को मिला, जहां दिनदहाड़े एक व्यक्ति की निर्मम हत्या कर दी जाती है और हमारी “सुशासन बाबू” की पुलिस अपराधियों के सामने साष्टांग नतमस्तक नजर आती है। सोचिए, यह वही बिहार है जिसके मुखिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं, जिन्हें स्वयं “सुशासन बाबू” के नाम से जाना जाता है! ऊपर से, बीजेपी के साथ मजबूत गठबंधन का अतिरिक्त बल भी है। फिर भी, स्थिति ऐसी है कि देखकर लगता है, या तो नीतीश कुमार की पुलिस में अब वो बात नहीं रही, या फिर उनके “लंबे हाथ” अब अपराधियों के सामने बिल्कुल बौने हो गए हैं।
कभी कहा जाता था कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं, लेकिन बिहार में तो लगता है, अपराधियों ने कानून के हाथों को इतना छोटा कर दिया है कि वे उन तक पहुंच ही नहीं पा रहे। अरे नहीं-नहीं, ऐसा बिल्कुल मत सोचिए कि पुलिस की साख जा रही है। अगर ऐसा होता, तो अपराधी भला यूं बिहार और बिहार पुलिस पर हावी होने की हिम्मत कैसे करते? यह तो बस “नया बिहार” है, जहां अपराधियों को खुली छूट मिलती है और पुलिस, शायद, अपने “भ्रष्टाचार” के दैनिक कोटा को पूरा करने में व्यस्त रहती है।
जनता जनार्दन तो बस यही पूछ रही है कि जब वीवीआईपी अस्पताल में भी सुरक्षा का यह आलम है, तो आम जनता की क्या बिसात? क्या “सुशासन बाबू” के राज में अपराधियों का बोलबाला इतना बढ़ गया है कि अब अस्पताल जैसी जगहों पर भी जीवन सुरक्षित नहीं रहा? या फिर, यह “भोकाल” का एक नया आयाम है, जहां अपराधी चुनौती दे रहे हैं कि हम कहीं भी, कभी भी कुछ भी कर सकते हैं और पुलिस सिर्फ तमाशा देखेगी?
खैर, पुलिस अपनी “जांच” में जुटी है, और हमें पूरा विश्वास है कि जल्द ही कोई “बड़ा खुलासा” होगा, जिसमें शायद कुछ बेकसूर लोगों को धर दबोचा जाएगा और असली गुनहगार किसी और “भोकाल” की तैयारी में लगे होंगे। यह बिहार है, और यहां सब चलता है! बस सुशासन की परिभाषा समय-समय पर बदलती रहती है।
क्या आपको लगता है कि बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सरकार को और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है? आप अपनी राय कमेंट कर सकते है।