औरंगाबाद: लोक शिकायतों के त्वरित निष्पादन के लिए डीएम सख्त, द्वितीय अपीलीय प्राधिकार में सुनीं दर्जनों शिकायतें
Magadh Express:औरंगाबाद जिले में आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान और प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह तत्पर है। इसी क्रम में आज समाहरणालय स्थित कार्यालय प्रकोष्ठ में जिला पदाधिकारी, श्रीमती अभिलाषा शर्मा (भा.प्र.से.) ने ‘बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम’ के अंतर्गत द्वितीय अपीलीय प्राधिकार की सुनवाई की।
शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान है प्राथमिकता
सुनवाई के दौरान जिला पदाधिकारी ने परिवादियों की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना और संबंधित विभागों से प्राप्त रिपोर्टों का सूक्ष्मता से परीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि अधिनियम का मुख्य उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों का पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से निपटारा करना है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि हर शिकायत की जांच निष्पक्ष, तथ्यात्मक और गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए ताकि किसी भी स्तर पर जनहित का कार्य बाधित न हो।

सुनवाई में शामिल प्रमुख मामले
आज की सुनवाई में भूमि विवाद, अतिक्रमण और सरकारी योजनाओं से जुड़ी विभिन्न शिकायतों पर विस्तार से चर्चा हुई, जिनमें से मुख्य हैं:
- भूमि अधिग्रहण एवं केवाला विवाद: एनटीपीसी भूमि अधिग्रहण (अशोक यादव) और फर्जी केवाला के आधार पर सरकारी भूमि पर निर्माण (सुनील कुमार केसरी) जैसे गंभीर मामले।
- अतिक्रमण और सरकारी कार्य: निजी भूमि से विद्युत पोल हटाने, अधूरा पंचायत सरकार भवन पूर्ण कराने, और सार्वजनिक सड़क से अतिक्रमण हटाने जैसी मांगें।
- राजस्व एवं प्रशासनिक मामले: दाखिल-खारिज में देरी, जमाबंदी में छेड़छाड़ और मदनपुर अंचल अधिकारी से जुड़ी शिकायतें।
- मानवीय आधार पर सहायता: रामदुलारी देवी ने अपने पति की हत्या के उपरांत पुनर्वास और आर्थिक सहायता के लिए अपील की।

अधिकारियों को सख्त हिदायत
जिला पदाधिकारी ने सुनवाई के दौरान संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन सभी मामलों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर निपटाया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोक शिकायत निवारण व्यवस्था का उद्देश्य आम लोगों को त्वरित प्रशासनिक राहत प्रदान करना है, जिससे शासन और जनता के बीच विश्वास और मजबूत हो।
इस सुनवाई के माध्यम से औरंगाबाद प्रशासन ने यह संदेश दिया है कि आम नागरिकों की शिकायतों के प्रति प्रशासन की जीरो टॉलरेंस की नीति है और किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
