Aurangabad:नबीनगर के बरियावां पंचायत में आशा बहाली में मनमानी: पे मोबिलाइजरों ने डीएम को सौंपा आवेदन, दो साल से पारिश्रमिक न मिलने पर फूटा आक्रोश
Magadh Express: औरंगाबाद जिले के नबीनगर प्रखंड के अंतर्गत आने वाली बरियावां पंचायत में आशा कार्यकर्ता की बहाली को लेकर प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रेफरल अस्पताल नबीनगर के बीसीएम (BCM), स्थानीय जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की कथित मनमानी व मिलीभगत के खिलाफ पे मोबिलाइजर (P-Mobilizer) कार्यकर्ताओं का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। पिछले दो वर्षों से निष्ठापूर्वक सेवाएं दे रहे इन कार्यकर्ताओं ने जिला पदाधिकारी (DM), औरंगाबाद को विधिवत आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला और मुख्य आरोप?
पीड़ित मोबिलाइजर कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन को दिए गए अपने आवेदन में कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जो इस प्रकार हैं:
- बहाली प्रक्रिया में मनमानी और तिथि विस्तार: नियमानुसार आशा चयन प्रक्रिया में पी-मोबिलाइजर कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दिए जाने का प्रावधान है। परंतु, आरोप है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों के दबाव और अस्पताल के अधिकारियों की मिलीभगत से बिना किसी ठोस कारण के बहाली की तिथियों को बार-बार बढ़ाया जा रहा है।
- दो साल से मानदेय/पारिश्रमिक रुका: पिछले दो वर्षों से लगातार जमीनी स्तर पर कार्य करने के बावजूद इन मोबिलाइजर कार्यकर्ताओं को अब तक एक भी रुपये का पारिश्रमिक नहीं मिला है। समय पर भुगतान न होने के कारण इन कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों के समक्ष गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है।
उच्च स्तर पर भेजी गई आवेदन की प्रतियां
मामले की गंभीरता को देखते हुए पे मोबिलाइजरों ने जिला पदाधिकारी के अलावा अपनी इस शिकायत की प्रतियां राज्य और जिले के कई प्रमुख प्रशासनिक एवं राजनीतिक पदाधिकारियों को भेजी हैं, ताकि इस पर त्वरित संज्ञान लिया जा सके।
इन प्रमुख अधिकारियों और कार्यालयों को प्रेषित की गई है प्रतिलिपि:
- माननीय मुख्यमंत्री, बिहार सरकार
- माननीय स्वास्थ्य मंत्री, बिहार सरकार
- अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव, पंचायती राज विभाग, बिहार सरकार
- उप विकास आयुक्त (DDC), औरंगाबाद
- सिविल सर्जन, औरंगाबाद
- प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, रेफरल अस्पताल नबीनगर
मोबिलाइजरों की मुख्य मांगें
पीड़ित कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, प्रावधानों के अनुरूप प्राथमिकता के आधार पर पारदर्शी तरीके से आशा बहाली की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए और पिछले दो वर्षों से बकाया पड़े पारिश्रमिक का शत-प्रतिशत भुगतान शीघ्र सुनिश्चित किया जाए।
