बिहार में संभावित बाढ़ और सुखाड़ को लेकर सीएम सम्राट चौधरी ने की हाईलेवल मीटिंग, औरंगाबाद जिला प्रशासन ने तैयार किया महा-प्लान
Magadh Express:आगामी मानसून और मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए बिहार सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। आज दिनांक 21 मई 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री, बिहार की अध्यक्षता में संभावित बाढ़, सुखाड़ एवं हीट वेव (लू) की पूर्व तैयारियों को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में औरंगाबाद एनआईसी (NIC) सभाकक्ष से जिला पदाधिकारी श्रीमती अभिलाषा शर्मा (भा०प्र०से०) और पुलिस अधीक्षक श्री अम्बरीष राहुल सहित तमाम जिला स्तरीय अधिकारी वर्चुअली जुड़े रहे।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से सोन नदी के तटवर्ती गांवों में बाढ़ पूर्व तैयारियों को समय से पूरा करने का निर्देश दिया और कहा कि आवश्यकता पड़ने पर गया तथा बिहटा से एनडीआरएफ (NDRF) व एसडीआरएफ (SDRF) टीमों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

विभागवार तैयारियों का पूरा ब्योरा:
1. बाढ़ राहत एवं आपदा प्रबंधन की तैयारी
- राहत सामग्रियां: जिले में फिलहाल 1409 पॉलीथीन शीट उपलब्ध हैं और 1200 अतिरिक्त शीट के लिए गया जिले से मांग की गई है। राहत सामग्रियों की दरों के निर्धारण हेतु निविदा प्रकाशित हो चुकी है।
- निजी नावें: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों (गोह में 3, हसपुरा में 3 और बारूण में 5) के लिए कुल 11 निजी नावों के साथ एकरारनामा (एमओयू) किया गया है।
- शिविर और डेटा: जिले में कुल 84 स्थलों को बाढ़ राहत शिविर और सामुदायिक रसोई के लिए चिन्हित किया गया है। आपदा सम्पूर्ति पोर्टल पर 1,55,208 लाभार्थियों का आधार आधारित डेटा अपडेट कर लिया गया है।
2. जल संसाधन, नहरे और सिंचाई व्यवस्था
- तटबंधों की मरम्मत: सोन नदी के तटबंधों की मरम्मत डिहरी सिंचाई परिक्षेत्र और अन्य नदियों के तटबंधों की मरम्मत पटना बाढ़ नियंत्रण परिक्षेत्र द्वारा कराई जा रही है।
- नहरों की सफाई: पूर्वी सोन नहर, पटना मुख्य नहर और उत्तर कोयल नहर प्रणाली के अंतिम छोर (टेल एंड) तक पानी पहुंचाने के लिए सफाई और मरम्मत का कार्य जारी है। जरूरत पड़ने पर ‘तांती प्रणाली’ लागू की जाएगी। इसके अलावा, लघु सिंचाई प्रमंडल के तहत आहर, तालाब, चेकडैम और नलकूपों की 1566 योजनाएं संचालित हैं।

3. कृषि विभाग: कम बारिश के लिए ‘आकस्मिक फसल योजना’
जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि आकस्मिक फसल योजना तैयार कर ली गई है। सामान्य मानसून में धान, मक्का और अरहर की बुआई होगी। यदि मानसून में देरी होती है या कम बारिश होती है, तो किसानों को कम अवधि वाले धान और वैकल्पिक फसलों जैसे— मडुआ, कुल्थी, उरद, मसूर, तिल, चना और तोरिया की खेती करने की सलाह दी गई है।
4. पशुपालन और स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी
- पशुओं के लिए: वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पशुचारा की दरें तय कर निविदा चुनी जा चुकी है। जिले में 33 पशु शिविर और 12 कैटल ट्रफ (पशु प्याऊ) की व्यवस्था की गई है। पशुओं के इलाज के लिए 44 प्रकार की दवाएं स्टॉक में हैं।
- इंसानों के लिए: जलजनित बीमारियों से निपटने के लिए जिला स्तरीय टीम गठित की गई है। पर्याप्त मात्रा में ओआरएस (ORS), आईवी फ्लूड, एंटी डायरियल दवाएं, हैलोजन टैबलेट, एंटी स्नेक वेनम (सांप काटने की दवा) और एंटी रेबीज वैक्सीन सहित 364 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं।
5. पीएचईडी (PHED) एवं भू-जल स्तर
जिले का औसत भू-जल स्तर वर्तमान में 28.1 फीट दर्ज किया गया है। हर घर नल का जल योजना के तहत 2949 में से 2937 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। पेयजल संकट को देखते हुए अब तक 2144 खराब चापाकलों को दुरुस्त किया जा चुका है।

6. नगर निकायों की चाक-चौबंद व्यवस्था
- औरंगाबाद नगर परिषद: पेयजल संकट वाले क्षेत्रों में प्रतिदिन 10 टैंकरों से पानी भेजा जा रहा है। नालों की सफाई और प्याऊ का संचालन जारी है।
- नवीनगर व अन्य: नवीनगर में जलजमाव रोकने के लिए बड़े नाले का निर्माण पूरा कर डीजल पंप की व्यवस्था की गई है। देव, रफीगंज, बारूण और मदनपुर नगर पंचायतों में भी सफाई और पानी की मुकम्मल व्यवस्था है।
7. बिजली, सड़क और ग्रामीण कार्य विभाग
- विद्युत आपूर्ति: ऊर्जा विभाग ने बताया कि वर्तमान में शहरी क्षेत्रों में 23 से 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 22 से 23 घंटे बिजली दी जा रही है। खराब ट्रांसफार्मर को शहरों में 6 घंटे और गांवों में 24 घंटे के भीतर बदला जा रहा है।
- सड़क व पुल: पथ निर्माण विभाग ने सभी पुल-पुलियों के वेंट (निकासी रास्तों) की सफाई पूरी कर ली है और एसओपी के तहत आवश्यक सामग्री का भंडारण कर लिया है।