Aurangabad:नवीनगर में सिलचर रामकृष्ण आश्रम मंदिर की झलक: 105 फुट ऊँचा भव्य दुर्गा पूजा पंडाल

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Magadh Express:- औरंगाबाद जिले के नवीनगर नगर पंचायत क्षेत्र के अनुग्रह नारायण स्टेडियम में इस वर्ष दुर्गा पूजा के लिए सिलचर रामकृष्ण आश्रम मंदिर की प्रतिकृति पर आधारित एक 105 फुट ऊँचा भव्य पंडाल बनाया जा रहा है। जय जवान संघ सह श्री दुर्गा पूजा समिति द्वारा निर्मित यह पंडाल भक्तों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा।


पंडाल और प्रतिमा की मुख्य विशेषताएं

  • आकृति और ऊँचाई: पंडाल का निर्माण सिलचर रामकृष्ण आश्रम मंदिर के तर्ज़ पर किया जा रहा है और इसकी ऊँचाई 105 फुट होगी।
  • लागत: पंडाल निर्माण में लगभग 8 से 10 लाख रुपये की लागत आने का अनुमान है।
  • निर्माण कार्य: पंडाल बनाने के लिए बंगाल से आए कारीगर पिछले 20 दिनों से दिन-रात तैयारी में जुटे हैं और इसे षष्ठी की रात तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
  • प्रतिमाएं: मां भगवती और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां जहानाबाद और अरवल के कारीगरों द्वारा तैयार की जा रही हैं। प्रतिमाएं अजंता शैली की तर्ज़ पर बनाई जा रही हैं, जो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेंगी।
  • सजावट: पंडाल में बेहतरीन साज-सज्जा और कृत्रिम प्रकाश की व्यवस्था की जाएगी, जिससे इसकी भव्यता और बढ़ जाएगी।
    पूजा समिति और व्यवस्थाएं
  • समिति: यह भव्य आयोजन जय जवान संघ सह श्री दुर्गा पूजा समिति द्वारा हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कराया जा रहा है। समिति के अध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह हैं।
  • इतिहास: नवीनगर में दुर्गा पूजा की नींव पहली बार सन 1979 में रखी गई थी, और तब से लगातार यहां भव्य पूजा का आयोजन होता आ रहा है।
  • दर्शन: मां भगवती के दर्शन के लिए पंडाल का पट सप्तमी के दिन खोल दिया जाएगा।
  • सुरक्षा और सुविधा:
  • श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए दो प्रवेश द्वार बनाए जा रहे हैं।
  • महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग और प्रवेश की व्यवस्था की जा रही है।
  • सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं, जिसमें महिला और पुरुष पुलिस बल के साथ 100 स्वयंसेवक (वॉलंटियर) भी तैनात रहेंगे ताकि दर्शनार्थियों को कोई असुविधा न हो।

  • अन्य स्थानों पर भी तैयारी
    स्टेडियम के पंडाल के अलावा, शहर के अन्य स्थानों जैसे मंगल बाजार सब्जी मंडी, शनिचर बाजार, माँ दुःख हरणी मंदिर, परसिया पंडा मुहल्ला, और जनकपुर पोखरा आदि जगहों पर भी मूर्तियों की स्थापना की जाएगी, जिसकी तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं।

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