बिहार में चुनावी बिसात पर अब गाली-गलौज की चाल, क्या राजनीति का स्तर इतना गिर गया है?- शक्ति मिश्रा

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Magadh Express: बिहार में आगामी चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक माहौल गरम हो रहा है। लेकिन इस बार यह गर्मी विकास, रोजगार, शिक्षा या स्वास्थ्य के मुद्दों पर नहीं, बल्कि एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने और गाली-गलौज करने से पैदा हुई है। जहाँ एक तरफ राज्य के बड़े नेता भड़काऊ बयानबाजी और गालियों के सहारे जनता को उकसाने का काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता भी इस राजनीति का शिकार बनती दिख रही है।


वइस बारे में जानकारी देते हुए युवा समाजसेवी सह औरंगाबाद विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी शक्ति मिश्रा का मानना है कि यह सब जान-बूझकर किया जा रहा है। नेताओं को यह मालूम है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर विवाद खड़ा करके वह आसानी से सुर्खियाँ बटोर सकते हैं और अपने वोट बैंक को साध सकते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस बिहार ने कभी रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे गंभीर मुद्दों पर चुनाव देखे थे, आज उसी बिहार को गाली-गलौज के नाम पर बंद का सामना करना पड़ रहा है। अनुमान है कि इस तरह के बंद से राज्य को औसतन ₹5000 करोड़ का नुकसान हो सकता है, जिसमें प्रत्यक्ष जीडीपी में ₹2500 करोड़ की गिरावट और अन्य आर्थिक नुकसान शामिल हैं।


श्री मिश्रा ने कहा है कि लोगों का सवाल है कि क्या महाराष्ट्र या गुजरात जैसे राज्यों में कभी गाली के नाम पर बंद देखा गया है? यह स्थिति बिहार के लिए एक बड़ा दुर्भाग्य है। जहाँ एक तरफ औरंगाबाद सदर अस्पताल में मरीज़ मर रहे हैं, युवा रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं और बच्चे अच्छी शिक्षा के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नेता गाली के मुद्दे को भुनाकर अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने में व्यस्त हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य के विकास के असली मुद्दे कहीं पीछे छूट गए हैं और अब राजनीति केवल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने का खेल बनकर रह गई है।

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