Aurangabad:बिहार पुलिस का ‘ऑपरेशन विधि पालक’: बारुण और कंचनपुर थानों की अनूठी पहल से स्कूली बच्चे हुए जागरूक
Magadh Express:बिहार पुलिस द्वारा राज्य में कानून का राज स्थापित करने और जमीनी स्तर पर जन-जागरूकता फैलाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन विधि पालक’ के तहत औरंगाबाद जिले में लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आज बारुण एवं कंचनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत महिला पुलिस पदाधिकारियों और पुलिस कर्मियों द्वारा स्थानीय विद्यालयों में विशेष जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी और स्कूली बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों और सामाजिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे एक जिम्मेदार नागरिक बनने के साथ-साथ खुद को सुरक्षित रख सकें।

अभियान के प्रमुख बिंदु और उद्देश्य
आज के इस जागरूकता कार्यक्रम के दौरान पुलिस टीम ने छात्र-छात्राओं को निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी:
- साइबर अपराध से सुरक्षा: आज के डिजिटल युग में बच्चे और युवा तेजी से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ रहे हैं। पुलिस अधिकारियों ने बच्चों को ऑनलाइन फ्रॉड, सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल, अनजान लिंक पर क्लिक न करने और किसी भी प्रकार की साइबर ठगी से बचने के उपाय बताए। साथ ही, साइबर अपराध होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी गई।
- मानव तस्करी (Human Trafficking) के खिलाफ सजगता: तस्करों द्वारा भोले-भाले बच्चों और किशोरों को बहला-फुसलाकर महानगरों में बेचने के कुप्रयासों के प्रति बच्चों और शिक्षकों को सतर्क किया गया। संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की गई।
- बाल श्रम निषेध: बच्चों को उनके पढ़ने-लिखने की उम्र में श्रम करने के दुष्प्रभावों से अवगत कराया गया। बाल श्रम से जुड़े कानूनों और इसके खिलाफ समाज की जिम्मेदारी पर जोर दिया गया।
- महिला एवं बाल सुरक्षा कानून: महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए विभिन्न कानूनी प्रावधानों, पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और आपातकालीन सहायता सेवाओं जैसे डायल 112 और महिला हेल्प लाइन नंबरों की जानकारी दी गई।
पुलिस प्रशासन की प्रतिबद्धता
बारुण और कंचनपुर थाना की महिला पुलिस पदाधिकारियों ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि “कानून का डर नहीं, बल्कि कानून की जानकारी ही सुरक्षा की सबसे बड़ी ढाल है।” उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि वे किसी भी प्रकार की असामाजिक गतिविधि या डर का सामना करने पर झिझकें नहीं, बल्कि अपने शिक्षकों और नजदीकी पुलिस थाने से बेझिझक संपर्क करें।
इस जागरूकता कार्यक्रम से स्कूली बच्चों में खासा उत्साह देखा गया और उन्होंने सुरक्षा से जुड़े कई सवाल भी पूछे, जिनका पुलिस कर्मियों ने सरल भाषा में जवाब दिया। स्थानीय लोगों और विद्यालय प्रबंधन ने बिहार पुलिस के इस सकारात्मक कदम की भूरी-भूरी प्रशंसा की है।
