Bihar:(जहानाबाद) निर्दोष को जेल भेजने के मामले में आईजी ने की बड़ी कार्रवाई, नगर अंचल निरीक्षक और अनुसंधानकर्ता निलंबित,तत्कालीन थानाध्यक्ष की भूमिका की जांच के आदेश

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Magadh Express:गया मगध क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (IG) ने जहानाबाद में पुलिस की घोर लापरवाही और मनमानी के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए नगर अंचल निरीक्षक और अनुसंधानकर्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई एक पीड़ित युवक को बिना किसी ठोस सबूत या जख्म प्रतिवेदन के जेल भेजने के मामले में की गई है।

क्या था पूरा मामला?

पीड़ित युवक रिशु राज, जो महदपुर, जहानाबाद का निवासी है, ने मगध क्षेत्र के आईजी को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई थी। रिशु राज ने बताया कि 24 फरवरी 2025 को उनके विपक्षी अतुल आनंद ने उनके साथ मारपीट की थी, जिसके बाद उन्होंने नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उनका आवेदन नहीं लिया।
इसके विपरीत, विपक्षी अतुल आनंद के झूठे कोर्ट परिवाद पर पुलिस ने 29 अप्रैल 2025 को मामला दर्ज कर लिया। पीड़ित का आरोप है कि अनुसंधानकर्ता (पु०स०अ०नि० श्रीकांत कुमार सिन्हा) ने उनसे 30,000 रुपये की मांग की और रुपये न देने पर उन्हें हत्या के प्रयास (धारा-109 बी०एन०एस०) के फर्जी मामले में फंसाकर 1 फरवरी 2026 को जेल भेज दिया।

जांच में उजागर हुई पुलिस की मिलीभगत

पुलिस महानिरीक्षक ने इस पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा की, जिसमें कई चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आईं:

  • फर्जी बयान: कोर्ट परिवाद के आवेदक (अतुल आनंद) को यह जानकारी तक नहीं थी कि उनके परिवाद पर थाना में प्राथमिकी दर्ज हो गई है, फिर भी अनुसंधानकर्ता ने केस डायरी में वादी और गवाहों के बयान दर्ज कर लिए थे।
  • बिना साक्ष्य जेल: किसी भी मामले को सत्य करने और जेल भेजने के लिए ‘जख्म जांच प्रतिवेदन’ अनिवार्य है, लेकिन रिशु राज के मामले में इसके बिना ही उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
  • अंचल निरीक्षक की लापरवाही: नगर अंचल निरीक्षक, जहानाबाद (रघुनाथ प्रसाद) ने घटना स्थल का निरीक्षण किए बिना और बिना किसी साक्ष्य के ही मामले को सही मानकर गिरफ्तारी का निर्देश दे दिया था, जबकि नौ महीने बीतने के बाद भी उन्होंने स्थल का मुआयना नहीं किया था।
  • तत्कालीन थानाध्यक्ष की भूमिका: 24 फरवरी 2025 को पीड़ित द्वारा दिए गए आवेदन पर कार्रवाई न करने के मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष (पु०नि० दिवाकर विश्वकर्मा) की भूमिका की जांच के आदेश एसपी को दिए गए हैं।

विभागीय कार्यवाही और निलंबन

आईजी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अनुसंधान में लापरवाही, पक्षपात और विधि-विरुद्ध कार्य किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।

  • निलंबन: घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और संदिग्ध आचरण के आरोप में नगर अंचल निरीक्षक रघुनाथ प्रसाद और अनुसंधानकर्ता पु०स०अ०नि० श्रीकांत कुमार सिन्हा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
  • अगली कार्रवाई: निलंबन की अवधि के दौरान दोनों पुलिसकर्मियों को केवल जीवन-यापन भत्ता मिलेगा और उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
    यह कार्रवाई पुलिस महकमे में एक कड़ा संदेश है कि कानून के रखवाले यदि मनमानी करेंगे, तो उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

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