Bihar:​बिहार में ‘आर्थिक आपातकाल’? तेजस्वी यादव का दावा- ‘कर्मचारियों के वेतन-पेंशन के पैसे नहीं, बंद हो रहीं योजनाएं’

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Magadh Express:बिहार की सियासत में एक बार फिर वित्तीय प्रबंधन को लेकर शह-मात का खेल शुरू हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए तेजस्वी यादव ने बिहार की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं और मुख्यमंत्री से इस पर जवाब मांगा है।

तेजस्वी यादव के मुख्य आरोप और सवाल

तेजस्वी यादव ने सरकार की नीतियों को “पूंजीपरस्त और जनविरोधी” बताते हुए पूछा कि क्या बिहार दिवालिया होने की कगार पर है? उन्होंने आशंका जताई कि राज्य में वित्तीय आपातकाल जैसी स्थिति पैदा होने वाली है।
उनके आरोपों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

1. आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) का उपयोग

तेजस्वी यादव के हमले का मुख्य आधार हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक का एक फैसला है। उन्होंने कहा कि बिहार कैबिनेट ने मई, जून और जुलाई 2026 की सामाजिक सुरक्षा पेंशन देने के लिए बिहार आकस्मिकता निधि से ₹3,662 करोड़ निकालने की स्वीकृति दी है।नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, इस निधि का उपयोग केवल अप्रत्याशित संकट, प्राकृतिक आपदा या गंभीर वित्तीय विपत्ति के समय ही किया जाना चाहिए। नियमित पेंशन के लिए इस फंड का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि राज्य के हालात “खराब और खतरनाक” हो चुके हैं।

2. वेतन और पेंशन में देरी का दावा

  • तेजस्वी यादव ने दावा किया कि पिछले 4-5 महीनों से बिहार में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन का भुगतान सही समय पर नहीं हो पा रहा है क्योंकि सरकारी खजाना खाली है।इसके साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी ठेकेदारों के बकाये का भुगतान नहीं किया गया है।

3. विकास योजनाएं और जनकल्याणकारी योजनाएं ठप

ट्वीट के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में विकास कार्य पूरी तरह रुक गए हैं ।वर्ष 2023-24 में स्वीकृत कार्य योजनाओं का अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है, और नए प्रोजेक्ट्स की स्थिति और भी खराब है।फंड की कमी का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि कैबिनेट ने “बिहार राज्य फसल सहायता योजना” को बंद कर दिया है।इसके अलावा, छात्रवृत्ति (Scholarship) का पैसा न मिलने, ‘स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना’ के ठप होने और बिजली में भारी कटौती किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।

मुख्यमंत्री से जवाब की मांग

तेजस्वी यादव का बयान:
“नियमित बजटीय प्रावधान (Regular Budgetary Provisions) की बजाय आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) से ₹3,662 करोड़ की निकासी कर पेंशन देने जैसे निर्णय पर मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए कि दशकों से डबल इंजन सरकार होते हुए ऐसी नौबत क्यों आई?”

उन्होंने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें “गैर-जरूरी मुद्दों को हवा देने की बजाय” अविलंब प्रदेश की इस दयनीय वित्तीय स्थिति पर बिहार की जनता को संबोधित करना चाहिए और उनकी आशंकाओं को दूर करना चाहिए।

मामले का प्रशासनिक और तकनीकी पहलू

राजनीतिक आरोपों से इतर, इस मामले के तकनीकी पहलुओं को समझना भी जरूरी है:

  • आकस्मिकता निधि (Contingency Fund): भारतीय संविधान के अनुच्छेद 267 के तहत यह राशि किसी भी आपातकालीन या अप्रत्याशित खर्च के लिए रखी जाती है, जिसे बाद में विधायी मंजूरी (Regular Budgetary Provision) मिलने पर वापस समायोजित (Reimburse) कर दिया जाता है। विपक्ष इसे खजाना खाली होने का संकेत मान रहा है, जबकि सरकारी स्तर पर इसे तात्कालिक बजटीय तालमेल या प्रशासनिक सुगमता के रूप में देखा जाता है।
  • राजनीतिक सरगर्मी: बिहार में इस साल होने वाले राजनीतिक समीकरणों और आगामी चर्चाओं के बीच विपक्ष का यह हमला सरकार को बैकफुट पर लाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।अब देखना यह होगा कि सत्तापक्ष (भाजपा-जदयू गठबंधन) विपक्ष के इन गंभीर और तीखे आर्थिक आरोपों पर क्या तकनीकी स्पष्टीकरण और राजनीतिक पलटवार करता है।

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