Aurangabad :मानवता की मिसाल: दाउदनगर में जब ‘रक्तवीर’ ने थामी जिंदगी की डोर, एक सजग प्रयास से बची युवक की जान
Magadh Express): कहते हैं कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता और सेवा से बड़ा कोई कर्म नहीं। इस कहावत को दाउदनगर अनुमंडल के कुछ जागरूक समाजसेवियों और एक निस्वार्थ रक्तदाता ने सच कर दिखाया है। ओबरा प्रखंड के एक गरीब परिवार के चिराग को बुझने से बचाने के लिए जिस तरह पूरा कुनबा एकजुट हुआ, उसकी चर्चा आज हर जुबान पर है।
संकट में था जीवन, समय की थी कमी
मामला ओबरा प्रखंड के ललारो गांव का है, जहाँ के निवासी बिनोद पासवान के पुत्र सूरज कुमार अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गए। अस्पताल में भर्ती सूरज की स्थिति पल-पल बिगड़ रही थी और डॉक्टरों ने तत्काल रक्त की आवश्यकता बताई। परिवार के पास संसाधन सीमित थे और समय रेत की तरह हाथ से फिसल रहा था। अपनों को खोने का डर परिवार की आँखों में साफ दिख रहा था।

एक सूचना और शुरू हुई मुहिम
जब उम्मीद की सारी किरणें धुंधली पड़ने लगीं, तब रवि रंजन जी के माध्यम से यह सूचना ‘हैंड्स ऑफ प्रकाश चन्द्रा’ परिवार तक पहुँची। सूचना मिलते ही भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव सह समाजसेवी प्रकाश चन्द्रा (प्रकाश भैया) ने तुरंत इसे संज्ञान में लिया। उनके मार्गदर्शन में टीम सक्रिय हुई और एक जीवन बचाने की मुहिम युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई।
समाजसेवी राजा बाबू बने ‘जीवनदाता’
खून की तलाश के बीच दाउदनगर बाजार स्थित वीरेंद्र फल दुकान के संचालक और समाजसेवी राजा बाबू आगे आए। जैसे ही उन्हें पता चला कि एक युवक जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है, उन्होंने बिना एक पल की देरी किए रक्तदान करने का फैसला लिया। उनका यह निस्वार्थ निर्णय उस पीड़ित परिवार के लिए किसी देवदूत के संदेश से कम नहीं था।

अस्पताल में दिखा एकजुटता का भाव
रक्तदान के दौरान अस्पताल का माहौल बेहद भावुक और प्रेरणादायी रहा। इस नेक कार्य को सफल बनाने में चिंटू मिश्रा, मेराज शेख, प्रभात कुमार, डॉक्टर आर्यन राज, रवि रंजन और सुनील कुमार जैसे लोगों ने कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया। इन सभी की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होता है, तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी घुटने टेक देती है।
समाज की असली ताकत हैं ऐसे लोग: प्रकाश चन्द्रा
सफल रक्तदान के बाद प्रकाश चन्द्रा ने राजा बाबू के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा:
“समाज में राजा बाबू जैसे निस्वार्थ लोग ही मानवता की असली पूंजी हैं। एक यूनिट रक्त केवल तरल पदार्थ नहीं, बल्कि किसी टूटते हुए परिवार की उम्मीद होता है। हमारी टीम हमेशा ऐसे कार्यों के लिए तत्पर है जहाँ सेवा ही सर्वोपरि है।”
सीख: छोटा सा प्रयास, बड़ा बदलाव
रक्तदान के बाद जब पीड़ित के परिजनों के चेहरे पर संतोष और आँखों में राहत के आँसू दिखे, तो वहां मौजूद हर शख्स को अपनी मेहनत सफल लगी। यह घटना हमें सिखाती है कि हमारे द्वारा किया गया एक छोटा सा प्रयास किसी के घर का उजाला बरकरार रख सकता है।