Aurangabad:सूर्य नगरी देव में आस्था का महाकुंभ: अचला सप्तमी पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब,सूर्यदेव को दी गई जन्मदिन की बधाई

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Magadh Express: बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित ऐतिहासिक और पौराणिक सूर्य नगरी देव आज ‘जय छठी मैया’ और ‘भगवान भास्कर की जय’ के जयघोष से गुंजायमान रही। अवसर था भगवान सूर्य के जन्मोत्सव यानी अचला सप्तमी (जिसे रथ सप्तमी भी कहा जाता है) का। इस पावन तिथि पर भगवान सूर्य के दर्शन और पूजन के लिए तड़के सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।


पवित्र सूर्य कुंड में स्नान और अर्घ्य
श्रद्धालुओं का तांता शनिवार की देर रात से ही जुटना शुरू हो गया था। रविवार की सुबह कड़ाके की ठंड के बावजूद, भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई। सबसे पहले श्रद्धालुओं ने पवित्र सूर्य कुंड में स्नान कर भगवान भास्कर को जल अर्पित किया इसके बाद भीगे वस्त्रों में ही कतारबद्ध होकर भगवान सूर्य के मंदिर की ओर बढ़े। परंपरा के अनुसार, आज के दिन सूर्य को दीप दान और लाल फूल अर्पित करने का विशेष महत्व माना जाता है।


मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता
देव का यह सूर्य मंदिर अपनी वास्तुकला और पश्चिम मुख्य द्वार के लिए विश्व प्रसिद्ध है।मान्यता है कि: यह मंदिर स्वयं भगवान विश्वकर्मा द्वारा एक ही रात में निर्मित किया गया था। त्रेता युग के राजा ऐल ने यहाँ के कुंड में स्नान कर अपने कुष्ठ रोग से मुक्ति पाई थी, जिसके बाद से यहाँ आरोग्य की कामना लेकर आने वाले भक्तों का अटूट विश्वास बना हुआ है।

प्रशासन और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
हजारों की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और देव मंदिर न्यास समिति द्वारा व्यापक प्रबंध किए गए है ।जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा और पुलिस कप्तान अम्बरीष राहुल के निर्देश पर मंदिर परिसर और सूर्य कुंड के चारों ओर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लंबी कतारों और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई ताकि वृद्ध और महिला श्रद्धालुओं को असुविधा न हो।वहीं श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, स्वास्थ्य शिविर और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया।


अचला सप्तमी का महत्व
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, माघ शुक्ल सप्तमी को ही भगवान सूर्य का प्राकट्य हुआ था। आज के दिन सूर्य देव की आराधना करने से शारीरिक रोगों से मुक्ति मिलती है और जीवन में तेज व ऊर्जा का संचार होता है। देव में साल के दो महापर्वों (चैती और कार्तिक छठ) के अलावा अचला सप्तमी पर भी ‘मिनी मेला’ जैसा नजारा देखने को मिलता है।

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