औरंगाबाद: ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत पांडुलिपियों के संरक्षण की समीक्षा, राज्य में छठे स्थान पर पहुंचा जिला

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Magadh Express:भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्राचीन ग्रंथों को सहेजने के लिए शुरू किए गए महत्वाकांक्षी “ज्ञान भारतम् मिशन” को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। मंगलवार, 09 जून 2026 को बिहार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य भर में चल रहे पांडुलिपियों (Manuscripts) के संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन कार्य की बिंदुवार प्रगति की समीक्षा की गई।इस महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक में औरंगाबाद समाहरणालय से जिला पदाधिकारी (डीएम) श्रीमती अभिलाषा शर्मा (भा०प्र०से०), जिला पंचायती राज पदाधिकारी इफ्तिखार अहमद और जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी कुमार पप्पू राज मुख्य रूप से शामिल हुए।

क्या है “ज्ञान भारतम् मिशन”?

इस मिशन के अंतर्गत 75 वर्ष या उससे अधिक पुराने उन सभी हस्तलिखित दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन (Digitalization) किया जा रहा है, जो किसी भी पारंपरिक माध्यम पर लिखे गए हों, जैसे:

  • कागज, भोजपत्र या ताड़पत्र (Palm leaves)
  • कपड़ा, धातु अथवा अन्य ऐतिहासिक सामग्रियां
    मुख्य उद्देश्य: भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है। इन दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने के बाद, इनमें छिपे ज्ञान का शोध, अनुवाद और प्रकाशन किया जाएगा, जिससे इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित किया जा सके।

औरंगाबाद जिले की बड़ी उपलब्धि: राज्य में मिला छठा स्थान

समीक्षा के दौरान औरंगाबाद जिले के लिए एक गौरवपूर्ण आंकड़ा सामने आया है। जिला प्रशासन के सक्रिय प्रयासों के कारण अब तक जिले में लगभग 26,158 हस्तलिखित दस्तावेजों की पहचान की जा चुकी है। इस शानदार प्रगति के साथ औरंगाबाद जिला पूरे बिहार राज्य में संचालित इस विशेष सर्वेक्षण में छठे (6th) स्थान पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि जिले में ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति गंभीरता को दर्शाती है।

भौतिक सत्यापन और वैज्ञानिक संरक्षण

दस्तावेजों की पहचान के बाद का अगला चरण बेहद महत्वपूर्ण है:

  • सर्वेक्षण के बाद विशेषज्ञों (Experts) की एक विशेष टीम चिन्हित स्थलों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करेगी।
  • पांडुलिपियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उनका विशेष उपचार (Chemical and Preventive Treatment) किया जाएगा, ताकि प्राचीन पत्रों को दीमक, नमी या समय के साथ होने वाले क्षरण (Decay) से बचाया जा सके।

मुख्य सचिव के कड़े निर्देश: 15 जून तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य

बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सर्वेक्षण का कार्य पूरी तरह शुद्ध, प्रामाणिक और तथ्यपरक होना चाहिए ताकि राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर स्क्रूटनी के दौरान डेटा रिजेक्शन (अस्वीकृति) की स्थिति पैदा न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। पूरे राज्य में इस सर्वेक्षण कार्य को पूरा करने की अंतिम समयसीमा 15 जून 2026 निर्धारित की गई है।

जिला प्रशासन की आम जनता से अपील: स्वामित्व आपका ही रहेगा

जिला प्रशासन, औरंगाबाद ने आम नागरिकों और विभिन्न संस्थाओं से इस ऐतिहासिक अभियान में भागीदार बनने की अपील की है।

महत्वपूर्ण सूचना और संपर्क:
यदि किसी भी जिलावासी या धार्मिक/सामुदायिक संस्था के पास 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी कोई भी हस्तलिखित पुस्तक, दस्तावेज, पत्र या ग्रंथ सुरक्षित है, तो वे इसके डिजिटाइजेशन के लिए जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी, औरंगाबाद श्री कुमार पप्पू राज (मोबाइल नंबर: 7488153690) से सीधे संपर्क कर सकते हैं।

स्वामित्व पर स्पष्टीकरण: जिला प्रशासन ने जनता की किसी भी आशंका को दूर करते हुए आश्वस्त किया है कि इन पांडुलिपियों का मूल दस्तावेज संबंधित व्यक्ति या संस्था के पास ही पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। सरकार केवल इसकी एक डिजिटल कॉपी (स्कैन) तैयार करेगी, ताकि भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक पटल पर पहचान दिलाई जा सके।

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