Aurangabad:रक्षक जब बने जीवनदाता: सीमा की सुरक्षा के साथ मानवता की रक्षा कर रहे भारतीय सेना के जवान दीपक यादव और अंगरक्षक बलजीत सिंह, पढ़े पूरी खबर
Magadh Express:“सच्ची सेवा वही है, जो कर्तव्य की सीमाओं से आगे बढ़कर मानवता के लिए समर्पित हो जाए।” इस पंक्ति को चरितार्थ करते हुए दो वीर सपूतों ने समाज के सामने इंसानियत की एक ऐसी बेमिसाल नज़ीर पेश की है, जिसने न सिर्फ दो परिवारों की खुशियाँ लौटाई हैं बल्कि पूरे क्षेत्र का सर गर्व से ऊँचा कर दिया है।
देश की सीमाओं पर चौबीसों घंटे तैनात रहकर हमारी सुरक्षा करने वाले भारतीय सेना के जवान और समाज की सुरक्षा में लगे अंगरक्षक जब किसी अनजान व्यक्ति की जिंदगी बचाने के लिए अपनी रगों का खून दान करते हैं, तो उनकी सेवा का महत्व और भी महान हो जाता है। ऐसी ही मानवता की अद्भुत मिसाल पेश की है हैंड्स ऑफ प्रकाश चंद्रा के सम्मानित सदस्यों ने।

घटना १: सेना के जवान दीपक यादव ने पेश की सेवा की अनुपम मिसाल, किया ५वाँ स्वैच्छिक रक्तदान
पहली घटना दाउदनगर के ग्राम उमरचक की है, जहाँ के निवासी और वर्तमान में भारतीय सेना (आर्मी) में कार्यरत दीपक यादव ने अपनी छुट्टियों के दौरान भी देश सेवा का जज्बा कम नहीं होने दिया।
नासरीगंज प्रखंड के ग्राम गम्हरिया निवासी शांति देवी (पति श्री जीमदार पासवान) को इलाज के दौरान आपातकालीन स्थिति में रक्त की सख्त जरूरत थी। रक्त की व्यवस्था न होने से पूरा परिवार बेहद चिंतित और परेशान था। जैसे ही इस बात की सूचना अमरजीत पासवान जी के माध्यम से मिली, दीपक यादव जी ने बिना एक पल गंवाए अस्पताल पहुँचकर मरीज के लिए पाँचवीं बार स्वैच्छिक रक्तदान किया। देश की रक्षा के साथ-साथ समाज सेवा के प्रति उनका यह समर्पण वास्तव में प्रेरणादायक है।
इस पुनीत कार्य के दौरान रक्तदाता का उत्साहवर्धन करने के लिए चींटू मिश्रा , मेराज शेख , अमरजीत पासवान , रविरंजन एवं प्रकाश विश्वकर्मा मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

घटना २: अमृतसर के बलजीत सिंह ने ‘रक्तवीर’ बन बचाई हसपुरा की शांति देवी की जान
दूसरी घटना में, माननीय विधायक सह भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव ‘प्रकाश भैया’ के अंगरक्षक बलजीत सिंह जी (निवासी: अमृतसर, पंजाब) ने यह साबित कर दिया कि एक रक्षक केवल सुरक्षा कवच बनकर ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर जीवनदाता बनकर भी फर्ज निभा सकता है।
हसपुरा प्रखंड के ग्राम कोईलवा निवासी शांति देवी (पति पुरान मिस्त्री) की हालत बेहद गंभीर थी और वे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थीं। डॉक्टर अरविंद कुमार जी द्वारा जब इस गंभीर स्थिति की सूचना दी गई, तो माननीय विधायक प्रकाश भैया के अथक प्रयासों और पहल पर बलजीत सिंह जी तुरंत आगे आए। उन्होंने बिना किसी संकोच के रक्तदान कर गंभीर रूप से बीमार महिला को नया जीवनदान दिया।
इस मानवीय कार्य के अवसर पर चिंटू मिश्रा , अजीत कुमार , आयाज अहमद एवं पुष्पा देवी जी उपस्थित रहे और सभी ने बलजीत सिंह के इस निस्वार्थ कदम की भूरि-भूरि सराहना की।

माननीय विधायक ‘प्रकाश चंद्रा’ ने जताया आभार: “ऐसे युवा ही समाज की असली ताकत”
हैंड्स ऑफ प्रकाश चंद्रा के संरक्षक, माननीय विधायक सह भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव प्रकाश चंद्रा ने दोनों रक्तवीरों—दीपक यादव और बलजीत सिंह—को हृदय से धन्यवाद देते हुए शुभकामनाएँ दीं।कहा कि ..
”देश की सीमा पर राष्ट्र की रक्षा और रक्तदान के माध्यम से मानव जीवन की रक्षा करना, सेवा और समर्पण का सबसे बड़ा उदाहरण है। रक्तदान के माध्यम से किसी व्यक्ति को जीवनदान देना सबसे बड़ा मानव धर्म है। ऐसे जांबाज युवा ही हमारे समाज की असली ताकत हैं, जो देश सेवा के साथ-साथ मानवता की सेवा में भी हमेशा अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। ‘हैंड्स ऑफ प्रकाश चंद्रा’ परिवार इन दोनों वीरों के सेवा भाव, समर्पण और मानवीय सोच को नमन करता है।”
—श्री प्रकाश चंद्रा ( विधायक,ओबरा विधानसभा)
“रक्षक जब रक्तदाता बन जाए, तो मानवता का सम्मान और भी बढ़ जाता है।” इन दोनों जवानों के इस नेक कार्य ने समाज को यह संदेश दिया है कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। इनका यह निस्वार्थ योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

