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सूर्य महोत्सव के शुरुआत से ही भंग था विधि व्यवस्था , अधिकारी नहीं थे मुस्तैद,

मगध एक्सप्रेस [ 13 फरवरी 19 ];- औरंगाबाद जिले के ऐतिहासिक सूर्य नगरी देव में अचला सप्तमी पर आयोजित सूर्य महोत्सव में बीती रात हुई झड़प , हंगामा और पत्थरबाजी के बाद स्थानीय लोगो ने खुलकर अपनी राय मगध एक्सप्रेस से साझा किया है।  नाम न बताने की शर्त पर कई लोगो ने कहा है कि अधिकारी से लेकर पुलिसकर्मी तक अक्षरा सिंह के एक एक सिन को अपने मोबाइल में कैद करने के लिए वीआईपी , वीवीआईपी ,और प्रेस दीर्घा तक को पार करते हुए मंच के नजदीक सटे हुए थे।

जिनके ऊपर पूरी महोत्सव की विधि व्यवस्था की जिम्मेवारी थी वो अक्षरा सिंह के साथ सेल्फी लेने और मोबाइल कैमरे में कैद करने के लिए बेकाबू थे , आगे से अधिकारियों ने पूरी डी एरिया पर खड़ा होकर अपना कब्ज़ाजमा लिया था जिससे पीछे दर्शको को काफी परेशानी हो रही थी ,लाठी धारक पुलिसकर्मी मंच से हुए आवाज के बाद पीछे लोगो पर लाठियां बरसानी शुरू कर दी ,जिससे दर्शक दीर्घा में खड़े लोग आक्रोशित हो गए और गुस्साए लोगो ने कुर्सियां तोड़ी।  कुर्सियां तोड़ने के बाद लाठी धारक पुलिसकर्मी लोगो को दौड़ा दौड़ा कर पीटने लगे जिसके बाद लोगो ने उन्हें रोकने के लिए खेतो से मिटटी के ढेले भी फेंके।

 

स्थानीय लोगो और ने दर्शको आरोप लगाया कि प्रशासन अगर विधि व्यवस्था सही से नहीं कर सकती है तो महोत्सव को स्थानीय लोगो के भरोसे छोड़ दे।  स्थानीय भाजपा नेता सह जिला प्रवक्ता आलोक सिंह ने कहा कि महोत्सव समाप्ति तक स्वास्थ्य सुविधा का वहां कोई व्यवस्था नहीं था जिसके कारण कई घायलो को औरंगाबाद अस्पताल जाना पड़ा , इतना ही नहीं स्थानीय प्रशासन के बीडीओ , सीओ , थानाध्यक्ष सहित अन्य मजिस्ट्रेट को भीड़ में पीछे की ओर विधि व्यवस्था में होना चाहिए जो नहीं थे और मंच के सामने डी एरिया में कार्यक्रम का लुफ्त उठा रहे थे ऐसे में कहा जा सकता है कि महोत्सव की शुरुआत से ही विधि व्यवस्था भंग थी जिसका फायदा महोत्सव में मौजूद असमाजिक तत्वों ने उठाया और फिर से एक बार देव महोत्सव को बदनाम करने की कोशिस की गई है।

श्री सिंह ने आरोप लगाया है कि प्रशासन भी देव के महोत्सव को लेकर गंभीर नहीं होती है , यही कारण है कि समय से पहले बैठक नहीं होता है , जिनकी भागीदारी इस महोत्सव में होनी चाहिए वो नहीं हो पाती है , आनन फांनन मंच बनाया जाता है ,स्थानीय लोगो को दरकिनार कर जिला मुख्यालय के जूता व्यवसायी , कपड़ा दुकानदार जैसे वैसे लोग जिनकी समाजसेवा में कोई भागीदारी नहीं होती ,जिनका सूर्य महोत्सव और स्थानीय छठ मेला से कोई ताल्लुक नहीं होता उन्हें वीआईपी पास से नवाजा जाता है। श्री सिंह ने आगे कहा है कि महोत्सव में सिर्फ पैसो का बंदरबाट होता है यही कारण है कि इस बार के महोत्सव में देव से देवमोड तक लाइट ,बिजली की व्यवस्था नहीं की गई , जगह जगह तोरणद्वार और अभिनन्दन द्वार लगाया जाता था जो नहीं लगाया गया है। एलसीडी की पर्याप्त वयवस्था नहीं था , गायको का साउंड जिसकी आवाज चारो दिशा में गुंजनि चाहिए जो नहीं थी और आवाज सिर्फ पंडाल में ही रह जा रहा था जिसके कारण बाहर ठंढ में खड़े लोग न आवाज सुन पा  नहीं मंच पर  दिखाई दे रहा था।

 

एलसीडी बंद होने से महोत्सव पंडाल पर भारी हुई भीड़

सूर्य महोत्सव कार्यक्रम शुरुआत दौर से शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो रहा था लेकिन जैसे ही भोजपुरी गायिका अक्षरा सिंह मंच पर पहुंची वैसे ही टेंट संचालक द्वारा दाहिने साइड के एलसीडी को बंद कर दिया गया।  सैकड़ो लोग जो बाहर खड़े होकर एलसीडी में कार्यक्रम देख रहे थे ,एलसीडी बंद होने की वजह से उनका भीड़ का दबाव महोत्सव पंडाल पर पड़ा।  हर वर्ष चार एलसीडी लगाये जाते थे लेकिन दो लगाये गए  और जगह जगह चेक पोस्ट बनाकर सीआरपीएफ जवानो को लगाया जाता था जो नहीं लगाया गया। यह भी कारण है कि महोत्सव मंच पर दबाव बढ़ा और हंगामा की भेंट पूरा महोत्सव चढ़ गया। हद तो तब है जब महोत्सव स्थल के पीछे की ओर लाठीचार्ज , तोड़फोड़ और भगदड़ हो रही थी और इधर देव प्रखंड के स्थानीय अधिकारी डी एरिया में खड़े होकर अक्षरा सिंह के गीतों का लुफ्त उठा रहे थे।

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