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सूर्य आराधना का प्राच्य स्थल है देव ,अचला सप्तमी को देव में पहली बार निकली भव्य सूर्य रथ- यात्रा

वरिष्ठ पत्रकार सुरेश चौरसिया /रविकान्त

मगध एक्सप्रेस (12 जनवरी 19):-विश्व प्रसिद्ध प्राचीन सूर्य मंदिर देव स्थल पर इस बार अचला सप्तमी 12 फरवरी 2019 को उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा की तर्ज पर पहली बार देव सूर्य रथ यात्रा निकाली गई है। देव को राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर ले जाने के लिए इस रथयात्रा को और बुलंद करने की जरूरत है। यह स्थल सदियों से सूर्योपासना का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

ब्रह्म पुराण के अनुसार यहां भगवान श्री राम का आगमन हुआ था। उनके हाथों मंदिर में स्थापित शिवलिंग मौजूद है। भगवान श्री राम ने प्रथम शिवलिंग की स्थापना रामेश्वरम में किया था और दूसरे शिवलिंग की स्थापना पितृश्राद्ध करने के बाद गया से लौटने के बाद देव सूर्य मंदिर में किया था। तब उनके साथ उनकी धर्मपत्नी सीता जी भी मौजूद थीं। उन्होंने तब ब्राह्मणों को स्वर्ण दान और गो -दान भी किया था।


जब पांडव अज्ञातवास में अधिक कष्ट में थे, तब वे देव पहुंचकर घोर संकटों से मुक्ति पाने के लिए भगवान सूर्य की आराधना कर कष्ट से मुक्ति पा सके थे। देव में द्रौपदी ने छठ पर्व किया था।


यह वही देव का सूर्य मंदिर है जहां मुगल सम्राट औरंगजेब मंदिर का द्वार स्वतः पूर्व से पश्चिम होने पर नतमस्तक होकर भारत में अन्य मंदिरों को न तोड़ने का शपथ लिया था। वर्ष 1677 से 1707 ईसवी तक के अपने शासनकाल के दौरान औरंगजेब सूर्यभक्त बने रहे और प्रतिवर्ष और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान सूर्य को नमन करते थे तथा गरीब छठ व्रतियों को छठ पूजा हेतु पूजा सामग्री भी प्रदान किया करते थे।

देव में हर्षवर्धन कालीन संस्कृत कवि मयूर भट्ट और बाण भट्ट सूर्योपासना करने पहुंचते थे। यहां आदि शंकराचार्य का भी आगमन हुआ था। यहां प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग का भी आगमन हुआ था। देव के बाद व्हेन सांग नालंदा के बालार्क सूर्य मंदिर जाकर भगवान सूर्य का दर्शन किया था।

 

देव सूर्यमंदिर के गर्भ गृह में त्रिकालदर्शी भगवान सूर्य के स्वरूप तीनों मूर्ति ब्रह्मा, महेश्वर और विष्णु के रूप में स्थापित है। अचला सप्तमी 12 फरवरी अर्थात आज है। इसे सूर्य सप्तमी व्रत, आरोग्य सप्तमी, पुत्र सप्तमी आदि नामों से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान सूर्य की उपासना करना श्रेष्ठ फलदाई माना जाता है। विशेषकर रथ यात्रा को खींचना बड़ा पुण्य और सौभाग्य शाली माना जाता है।देव निवासियों के लिए यह बड़े ही गर्व और सौभाग्य की बात है कि अचला सप्तमी के पावन पर्व पर इस बार देव में प्रथम सूर्य रथयात्रा निकाली जा रही है।

 

रथ यात्रा का आयोजन देव की सामाजिक संस्थान पर्यटन विकास केंद्र देव ने किया है । इस संस्था के दर्जनों कार्यकर्ता पिछले कई माह से इस यात्रा को भव्य एवं ऐतिहासिक रूप देने में लगी हुई थी जो आज साकार हुआ और धरातल पर सूर्य रथ यात्रा की ऐतिहासिकता और भव्यता देखने के लिए और भगवान सूर्य के दर्शन मात्र के लिए हजारो की संख्या में महिला पुरुष श्रद्धालुओ की भीड़ उमड़ पड़ी है और देव की चारो ओर भक्तिमय गीत और भगवान सूर्य के जयकारों की आवाज स्पष्ट रूप से सुनाई दे रही है ।इस रथयात्रा में रणधीर चंद्रवंशी , उमा सिंह , पवन पाण्डेय , रवि रंजन प्रकाश ,उदय सिंह , दीपक कुमार , विनोद चौधरी ,नंदलाल कुमार, रवि शंकर पाण्डेय , मुकेश सिंह ,सहित देव पर्यटन विकास केंद्र से जुड़े दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद है ।

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