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स्वास्थ्य विभाग खुद अस्वस्थ , करोडो खर्च के बाद नतीजा शून्य ,पढ़ें

मगध एक्सप्रेस [ 19 जनवरी 19 ];-बिहार में लोगो की बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रत्येक वर्ष लाखो नहीं बल्कि करोडो खर्च कर रहा है लेकिन क्या करोडो खर्च के बाद भी  आम लोगो तक वो सुविधायें पहुँच रही है तो जवाब आएगा नहीं।  आज भी बिहार के ग्रामीण इलाको में रहने वाले लोगो को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।  आज हम आपको ले चलते है औरंगाबाद जिले के कई प्रखंडों में जहाँ ग्रामीण क्षेत्रो में रह रहे लोगो को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने करोडो तो खर्च कर दिया लेकिन उसका नतीजा शून्य है।

 

बिहार में पंचायत स्तर पर आम लोगो को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले इसको लेकर बिहार सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने बड़े पैमाने पर खर्च कर पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र की परिकल्पना करते हुए लाखो करोडो रुपये की खर्च से भवन तो बना दिया लेकिन आज भवन की स्थिति ऐसी है कि उप स्वास्थ्य केंद्र पशु बांधने , चारा रखने सहित कई अन्य कार्यो के लिए उपयोग किया जा रहा है।

औरंगाबाद जिले के देव प्रखंड स्थित बनुआ पंचायत में लाखो रुपये की लागत से निर्मित यह उप स्वास्थ्य केंद्र की बात कि जाय तो भवन निर्माण के साथ साथ इसके सञ्चालन में प्रयुक्त होने वाले सभी तरह के उपकरण और व्यवस्था  इसे लैस किया गया , लेकिन निर्माण के बाद से यहाँ  चिकित्स्क आये और नहीं कोई एएनएम। विभाग के हजारो रुपये के उपकरण और सामान कहाँ गायब हो गए यह तो नहीं पता चला लेकिन स्वास्थ्य विभाग का यह उपकेंद्र आज अपनी बदहाली की दंश झेल रहा है।  शौचालय पूरी तरह ध्वस्त हो चूका है और स्वास्थ्य उप केंद्र के चारो ओर बड़ी बड़ी झाड़ियों ने इसे अपने आगोश में ले लिया है।  यही नहीं यहाँ इस भवन में असमाजिक तत्वों का भी जमावड़ा लगता है।  यूँ कहे तो लाखो रुपये खर्च के बाद भी यह स्वास्थ्य उप केंद्र अस्वस्थ होकर बदहाली की भेंट चढ़ गया।

 

ऊपर दी गई तस्वीर को आप देख सकते है यह नजारा है देव प्रखंड के स्वास्थ्य उप केंद्र बिष्णुपुर चट्टी का।  यहाँ भी पंचायत में आम लोगो की बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने लाखो खर्च कर भवन तो बना दिया लेकिन भवन निर्माण के बाद इस उपकेंद्र का ताला नहीं खुला।  उप स्वास्थ्य केंद्र के सामने स्थानीय लोगो  पशु बांधने का कार्य शुरू कर दिया।  स्थानीय लोगो ने बताया कि यहाँ एक एएनएम और चिकित्सक तैनात है जो कभी कभी आते है लेकिन बात अगर भवन की किया जाय तो यह कभी खुलता ही नहीं है ।ग्रामीणों में सूर्यदेव यादव , जय मंगल यादव , कमलेश पासवान ने बताया कि इस उपकेंद्र के अंदर बेंच , कुर्सी , टेबल , फर्नीचर के सभी सामान और स्वास्थ्य उपकरण है लेकिन इसका कोई उपयोग नहीं है। स्वास्थ्य उपकेंद्र नहीं खुलने के कारण हमलोग यहाँ अपनी पशुओ को बांधते है।

 

यह तस्वीर है औरंगाबाद जिले के सदर प्रखंड स्थित एनएच 2 कनबेहरी गाँव की है।  यहाँ भी स्वास्थ्य विभाग ने लाखो रुपये खर्च कर स्थानीय लोगो की बेहतर स्वास्थ्य सुविधा को लेकर उपकेंद्र तो बना दिया लेकिन यह उपकेंद्र आज स्थानीय लोगो की भूसा ,कुट्टी सहित पशुओ के खाने का चारा रखने एवं पशुओ को बाँधने का काम किया जाता है।  इतना ही नहीं कुछ लोगो ने इसे कब्ज़ा कर अपना रैन बसेरा भी बना दिया है।  औरंगाबाद से मदनपुर के बिच यह स्वास्थ्य उपकेंद्र इस उद्देश्य से बनाया गया था कि स्थानीय लोगो को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले ही लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 2 पर होने वाले हादसों के दौरान उन्हें तत्काल चिकित्सा इस अस्पताल से उपलब्ध हो सके।  स्थिति यह है कि निर्माण के बाद आज तक इस अस्पताल में नतो चिकित्सक आये और नहीं यह अस्पताल लोगो की उम्मीदों पर खरा उतर सका।

औरंगाबाद जिले के देव , मदनपुर , रफीगंज , ओबरा , कुटुम्बा , बारुण , नवीनगर , गोह , हसपुरा , दाउदनगर , सदर प्रखंड के दर्जनों पंचायतो में लोगो की बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के उद्देश्य से सरकार ने करोडो खर्च कर भवन तो बना दिया लेकिन समुचित उपयोग नहीं होने के कारण आज स्वास्थ्य विभाग का यह उपकेंद्र खुद अस्वस्थ है और करोडो खर्च के बाद भी जनमानस के लिए नतीजा शून्य निकला है।

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