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EXCLUSIVE , निजी स्कूलों की मनमानी से खतरे में आपके बच्चो की जान ,प्रशासन मौन , क्या बड़ी घटना का है इन्तजार ?

मगध एक्सप्रेस [ 13 जनवरी 19 ];-औरंगाबाद जिले में जिला मुख्यालय सहित देव , मदनपुर , कुटुम्बा ,ओबरा , नवीनगर ,बारुण , रफीगंज , , दाउदनगर ,रफीगंज , गोह , हसपुरा सभी प्रखंडों  निजी स्कूल संचालको की संख्या कुकुरमुत्ते की तरह होती जा रही है ,वहीँ इन निजी स्कूलों में छोटी गाड़ियों का उपयोग भी धड़ल्ले से हो रहा है।छोटी गाड़ियों से देश के भविष्य कहे जाने वाले छोटे छोटे बच्चो को ढोने का काम किया जा रहा है।  सभी छोटी गाड़ियां बच्चो को घर से स्कूल लाने एवं स्कूल से वापस घर पहुँचाने के लिए उपयोग हो रहा है  बच्चो को लाने, ले जाने लिए जिन वाहनों का प्रयोग हो रहा है उसमे गैस किट का प्रयोग कर घरेलू गैस से चलाया जा रहा है। 


शहर के समाजसेवा से जुड़े समाजसेवियों  का कहना है कि औरंगाबाद जिले में घरेलू गैस  लिए उपभोक्ताओ को नंबर लगाना पड़ता है । लेकिन वाहनों में इस्तेमाल करने के लिए वाहन चालकों के पास घरेलू गैस आसानी से उपलब्ध हो रही है, जो जांच का विषय है। विभाग को शीघ्र ही अभियान चला कर ऐसे वाहनों की चैंकिंग करनी चाहिए।वहीँ वाहन चेकिंग के दौरान भी ऐसे पकडे जाते है लेकिन कोई ठोस आदेश या गाइडलाइन नहीं होने की वहज से पुलिस के अधिकारी वाहन की जांच नहीं कर पा रहे है।  
 
स्कूल वाहनों में प्रयोग हो रहा एलपीजी गैस 
एक ओर जहा प्रधानमंत्री पर्यावरण को प्रदूषण रहित बनाने एवं महिलाओं को प्रदूषण जनित रोगों से बचाने के लिए घर-घर तक गैस का सिलेंडर पहुंचाने के प्रयास कर रहे हैं। वहीं क्षेत्र में घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडरों से गाड़ियों में गैस रिफलिंग करके गैस के अवैध कारोबारी जमकर लूट कर रहे हैं। हर माह एक गैस सिलेंडर की नीति के तहत 12 सिलेण्डर उपभोक्ता को देना तय किया गया है। लेकिन सिलेण्डरों के बीच में समय सीमा तय नहीं की गयी है। उपभोक्ता एक वर्ष में कभी भी 12 सिलेण्डर प्राप्त कर सकता है। इस कारण जिन उपभोक्ताओं को गैस की कम आवश्यकता होती है वे भी सब्सिडी के लालच में एजेन्सी से सिलेण्डर प्राप्त करके अवैध कारोबारियों को बेच देते हैं.
कमशिर्यल अथवा घरेलू एलपीजी सिलेंडर से रिफलिंग करना गैर कानूनी है। नियमानुसार एलपीजी स्टेशन पर ही वाहन में गैस भरवा सकते हैं। फिलिंग का सही तरीका पंप पर ही होता है लेकिन जब क्षेत्र में कोई पंप नहीं है तो गाड़ियों में गैस आ कहाँ से रही है यह जांच का विषय है। 
खतरों से अंजान अभिभावक ,निजी स्कूलों पर चढ़ा रहे चढ़ावा 
औरंगाबाद जिला मुख्यालय सहित सभी प्रखंडों में प्रत्येक दिन एक नई निजी विद्यालय धड़ल्ले से खुल रहे है।  जनवरी से लेकर मार्च अप्रैल तक सड़को पर नई नई स्कूलो का प्रचार प्रसार इन दिनों खूब देखा जा सकता है।  शहर में बड़े बड़े होर्डिंग बोर्ड लगाकार निजी स्कूल प्रबंधन अपने विद्यालयों की प्रचार प्रसार इस कदर कर रहे है जैसे उनका विद्यालय नहीं उनका फाइव स्टार होटल है।  महंगे पैसे देकर अभिभावक यह चाहते है कि विद्यालय उनके बच्चो को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे, लेकिन इसके बावजूद खतरों से अंजान अभिभावक यह नहीं जानते कि प्रतिदिन जिन गाड़ियों से उनके बच्चो को विद्यालय लाया जाता है और वापस घर पहुँचाया जाता है दरअसल इस दौरान विद्यालय प्रबंधन और वाहन मालिक उनके बच्चो की जान के साथ खेलते है। विद्यालय प्रबंधन पैसो की बचत कारण छोटी छोटी गाड़ियां जो घरेलु गैस से चलती है उन्हें सस्ते दर पर अपने अधीन ले लेती है और वाहन मालिक काम खर्च में ज्यादा कमाने की लालच में अपना वाहन विद्यालय प्रबंधन को दे देते है ,जबकि विद्यालय प्रबंधन बच्चो को सुरक्षित स्कूल लाने एवं सुरक्षित वापस घर पहुँचाने के दावे कर बच्चो के अभिभावकों से मोटी रकम वसूलते है।   
बताते कहले कि कुछ दिनों पूर्व जिलाधिकारी राहुल रंजन महिवाल ने एक कमिटी बनाई थी जिसमे जिला परिवहन पदाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी शामिल थे , इस कमिटी का उद्देश्य था निजी स्कूलों चल रहे वाहन की जांच करना और विद्यालय प्रबंधन से वाहन सम्बंधित कागजात के साथ एनओसी प्राप्त करना था लेकिन उक्त कमिटी  दो चार निजी विद्यालयो की जांच कर और कार्यवाई कर शांत हो गई लेकिन जिले में इन दिनों  निजी विद्यालयों की मनमानी से बच्चो की जान खतरे में है ऐसे में समय रहते अगर कदन नहीं उठाये गए तो वह दिन दूर नहीं जब इसका खामियाजा जिला प्रशासन , विद्यालय प्रबंधन , वाहन संचालक ,या अभिभावक , किसी को भी भुगतना पड़ सकता है।  

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